MILK THERAPY FOR MUSCLES
दूध की थेरेपी –
कमजोर मांसपेशियों को ताकत देने के लिए ,शिथिल पड़ी मांसपेशियों को कठोर बनाने के लिए पूरे शरीर पर दूध की मालिश की जाती हे ,यह मसाज उन रोगियों के लिए रामबाण हे जो किसी एक्सीडेंट के कारन स्पाइनल इंजरी या हेड इंजरी से कम्प्लीट बिस्तर पर हे ,उनको मिल्क थेरेपी से काफी लाभ होते देखा गया हे |
किस दूध की मालिश करें —
मालिश के लिय हम बकरी,गाय,भेंस ,भेड़,और ऊंटनी के दूध की मालिश कर सकते हे ,इनमे क्रमश मिल्क प्रोटीन की अधिकता होती हे इसलिए सबसे अच्छादूध भेड़ और ऊँटनी का दूध ठीक रहता हे इसमे उपस्थित प्रोटीन से मांसपेशियों को बल मिलता हे वह वापस अपनी स्वाभाविक अवस्था को प्राप्त करती हे |यदि भेड़ और ऊँटनी का दूध नही मिले तो हम गाय या भेंस का दूध भी मालिश के लिए कम में ले सकते हे |
मालिश किस प्रकार करें –
सम्पूर्ण शरीर पर दूध का मालिश करना चाहिए ,मालिश हमेशां प्रतिलोम किया जाना चाहिए ,अर्थात हमारे रोम छिद्रों के विपरीत दिशा में करे और इसमे हमारी कोशिश यह रहनी चाहिए की शरीर में अधिक से अधिक दूध रम जाये इसके लिए हम एक लीटर दूध का इस्तेमाल कर सकते हे या आवश्यकता के अनुसार दूध की मात्र कम या अधिक कर सकते हे |
कितने समय तक मालिश करें —
सम्पूर्ण शरीर पर धीरे धीरे मालिश करे ,इसमे कोई जल्दबाजी नही करनी चाहिए ,जब पुरे शरीर पर मालिश हो जाये तो फिर से दोबारा करे इस प्रकार पुरे शरीर पर मालिश करते हुए तीन राउंड पुरे करें ,इस प्रक्रिया में लगभग एक से डेढ़ घन्टे का समय लग जाता हे
दूध की मालिश किन किन रोगों में की जा सकती हे —
कोई भी ऐसी मेडिकल कंडीशन जिसके कारण शरीर के किसी भि हिस्से की मांसपेशियां कमजोर हो गई हो उनको पुनःअपनी स्तिथि में लाने के लिय दूध की मसाज करने के अलावा कोई समाधान नही हे ,पक्षाघात में, सेरेब्रल पालसी ,सेरेब्रल ATOPHY,MND, GB CINDROM, आदि अनेक रोगों में किया जाता हे|
एक्सीडेंट के कारन कई बार शरीर का कोई अंग कमजोर पड़ जाता हे या पतला हो जाता हे तो यदि उस अंग पर भेड़ या ऊंटनी के दूध का मालिश करने से और उस दूध को पिने से वह अंग पुनः अपनी स्वाभाविक स्तिथि में आ जाता हे |
इस प्रकार स्पाइनल इंजुरी ,हेड इंजुरी के कारन यदि रोगी ने पलंग पकड़ लिया हो तो उस स्तिथि में मिल्क थेरेपी बहुत लाभदायक होती हे।
डॉ मनोज शर्मा
कोटा, राजस्थान
9214068144
